As In Bhagavān Śrī Rāma, there are Sarvāvatārītva and SarvaKāraṇatva, same is said for Śrī Rāma-Nāma —
१. सर्वकारणत्व / Sarva-Kāraṇatva, The Supreme cause of all
श्रुति कहती है —
तथैव रामबीजस्थं जगदेतच्चराचरम् ।
रेफारूढा मूर्तयः स्युः शक्तयस्तिस्र एव चेति ॥
(श्रीरामतापिन्युपनिषद्)
“(सर्वकारणत्व) जैसे वटबीज में विशाल वटवृक्ष स्थित (निहित) है, उसी प्रकार राम बीज में समस्त चराचर जगत स्थित है। (सर्वावतारीत्व) समस्त भगवद्-स्वरूप (मूर्तयः) तथा तीन शक्तियाँ (स्वाभाविकी [आह्लादिनी-शक्ति], ज्ञान [संवित्-शक्ति], और क्रिया [संधिनी-शक्ति]) सभी राम नाम में स्थित हैं।”
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श्रीपद्म-महापुराण में श्रीवेदव्यासजी ऋषियों से कहते हैं —
रामनाम्नि परे धाम्नि संस्थिता स्वामिभिस्सह ॥
स्वाभाविकी तथा ज्ञानक्रियाद्याः शक्तयः शुभाः।
रामनामांशतो जाताः सर्वलोकेषु पूजिताः ॥
(पद्म-पुराण)
“ अनन्तकोटि ब्रह्माण्ड श्रीराम नाम के अंश से उत्पन्न होते हैं। श्रीराम नाम रूपी सर्वोत्कृष्ट परम तेजःस्वरूप [परम-धाम] में उसी नाम के अंश से उत्पन्न एवं सर्वलोक पूजित स्वाभाविकी [आह्लादिनी-शक्ति], ज्ञान [संवित्-शक्ति], और क्रिया [संधिनी-शक्ति] आदि भगवान् की स्वरुपभूता समस्त मङ्गलमयी शक्तियाँ अपने स्वामियों के साथ विराजमान हैं।”
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सर्वेऽवताराः श्रीरामनामशक्तिसमुद्भवाः ।
सत्यं वदामि देवेशि नाममाहात्म्यमद्भुतम् ॥
(स्कन्द-पुराण)
भगवान् शंकर पार्वतीजी से कहते हैं —
“ हे देवेशि पार्वती ! भगवान् के जितने अवतार होते हैं वे सारे श्रीरामनाम की अद्भूत शक्ति से प्रकट होते हैं। श्रीरामनाम की अद्भुत महिमा है, मैं सत्य कहता हूँ कि सभी अभिलाषाओं का त्याग करके कलियुग में श्रीरामनाम के उच्चारण से ही मोक्ष सम्भव है अन्य किसी उपाय से नहीं।”
जय श्रीसीताराम!
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